
देश के रंग, शब्दों के संग
कर्ण खंतवाल के साथ भारत, संस्कृति, इतिहास और जनमानस की संवेदनशील यात्रा
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ताज़ा लेख
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इतिहास के पन्नों से: छोटे शहरों की बड़ी कहानियां
इतिहास केवल राजधानियों में नहीं लिखा जाता. छोटे शहरों के चौक, बाजार और लोकस्मृतियां भी समय की महत्वपूर्ण दस्तावेज़ हैं.इस लेख में हम स्थानीय इतिहास की भूमिका समझेंगे….
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कविता: पहाड़ की चुप्पी में
जब शहर की आवाज़ थक जाती है, तब पहाड़ की चुप्पी बोलती है.उस चुप्पी में घर भी है, दूरी भी, और लौट आने की एक कोमल उम्मीद भी….
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समसामयिक विचार: सोशल मीडिया और जनमत की दिशा
आज जनमत का बड़ा हिस्सा डिजिटल मंचों पर बनता है. सवाल यह है कि शोर और सूचना के बीच विवेक कैसे बचाया जाए.यह लेख तथ्य-जांच, जिम्मेदार संवाद और नागरिक भूमिका पर केंद्रित है.
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भारतीय संस्कृति में पर्वों का बदलता अर्थ
समय के साथ त्योहारों की शैली बदली है, लेकिन उनके मूल में परिवार, सह-अस्तित्व और सामूहिकता की भावना आज भी मौजूद है.यह लेख परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन की बात करता है.
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देहरादून की सुबह: धुंध, चाय और शहर की धीमी लय
देहरादून की सुबह में एक अलग तरह की शांति है. इस लेख में हम राजपुर रोड से मसूरी बाईपास तक की उस धीमी लय को महसूस करेंगे, जहां धुंध, पहाड़ और लोगों की मुस्कान शहर को जीवंत बनाती ह…
